Thursday, 26 January 2017

26th January 2017 - The 68th Republic Day of India.

26th January 2017 - The 68th Republic Day of India.
सुबह जब आँख खुली तब खिड़की से देखा की बारिश आ रही थी। रजाई में से निकले बिना ही नौकरानी को चाय लाने के लिए आवाज़ लगादी। आज भारत अपना 68th गणतंत्र दिवस मानाने में मशगूल था और हम इस बहाने मिली एक छुट्टी का आनंद लेने की पूरी तयारी कर चुके थे। पुरे दिन घूमने फिरने और खरीदारी का कार्यक्रम बीबीजी ने एक दिन पहले से ही तय कर रखा था उस पर बारिश का आना, बस मजा ही आ गया। चाय पी के किसी तरह रजाई से निकले और तइयार होना शुरू किया। नहाने में आज मज़ा नहीं आया, गीज़र का पानी निवाया ही था, अगर सर्दी की सुबह गरमा गरम पानी से दस मिनट शावर में ना नहाया जाये तो ज़िन्दगी मैं रखा ही क्या है। खैर हमारे घर पे पहले से ही तय है बारिश मतलब पकोड़ियां, नाश्ता कर के बीबीजी और बच्चेजी को ले के हम पहले खरीदारी को निकले। सारे मॉल और दुकाने तिरंगे से सजी हुई थीं और गणतंत्रता दिवस के अवसर पे कई तरह की छूट भी दे रही थी। पूरा ही माहॊल देश भक्ति से ओत प्रोत लग रहा था। पुरे दिन घूमने फिरने और खरीदारी के बाद बीबीजी और बच्चेजी को शाम को घर छोड़ा और हमने कॉफ़ी हाउस जा के मौसम का आनंद कॉफ़ी के साथ उठाने का फैसला किया। दोस्तों और कॉफ़ी के साथ वक़्त का पता ही नहीं चला और रात हो गयी। रिमझिम तो दिन भर से हो ही रही थी थोड़ी ठण्ड भी बढ़ गयी थी। सभी ने एकमत में घर जाने का फैसला किया। हम सब कॉफ़ी हाउस से निकले और अपने अपने रस्ते हो लिए। मेरे एक दोस्त को ऑटो पकड़ना था तो मैंने कहा मैन रोड तक तुम्हारे साथ चलता हूँ वहां से तुम्हें ऑटो दिलवा के में निकल जाऊंगा। 

मैन रोड पे पहुंचे तो रिमझिम से बचने के लिए हम बस स्टॉप की तरफ बढ़े, मगर वहां इन् गरीब भिखारियों ने पहले से ही कब्ज़ा जमा रखा था। शर्म भी नहीं आती इन् लोगों को,रात भर यहाँ सोयेंगे और ठण्ड में कुछ हो गया तो सरकार को दोष देंगे। मैंने उनकी तरफ मुंह कर के कहा जब सरकार ने तुम लोगों के सोने के लिए रैन बसेरे बनवा रखें हैं तो यहाँ क्यों सोते हो? उन में से एक ने कहा - साहब गाँव से मेहनत मजदूरी करने आये हैं और रैन बसेरे वाले बिना आई.डी. के रहने नहीं देते। इतने में उनमें से दूसरा बोल उठा साहब अगर इतने ही कागजात होते तो हमें रैन बसेरे की जरुरत होती क्या?

Tuesday, 24 January 2017

Jaipur Literature Festival 2017

Jaipur Literature Festival 2017
For me Jaipur Literature Festival 2017 was more or less like the picture above which I took there only. At the end of Jaipur Literature Festival 2016 I felt that Jaipur Literature Festival has turned into a cauliflower from a beautiful flower but I was wrong. This year the feeling became more clear to me. Jaipur Literature Festival has not turned into a cauliflower, it is still a beautiful flower but now it is a Plastic Flower. It has lost it's life.

Friday, 13 January 2017

Evening at Jawahar Kala Kendra, Jaipur.

Evening at Jawahar Kala Kendra, Jaipur.
Today I was again at Indian Coffee House and today I again ordered the World’s worst black coffee there. This is nothing new four days in a week you can find me there, drinking the worst black coffee of the world and cribbing about it. But today when I was there, I took this shot and I liked it. This is also not new most of the times I carry my camera with me and take random shots of Jawahar Kala Kendra and end up liking them.

Now the question came to my mind was why do I like these shots and why do I love this place? I don’t know, I really don’t know.

Saturday, 7 January 2017

Mens Bracelet, Silver Jewelry.

Jai Shree Ram Silver jewelry
I started my career as product designer but with product designing I started Photography also and then Photography took the main stage. From last few years I was occasionally designing jewelry for some jewelers but now trying to launch an Exclusive Product line of Jewelry with my photography. Cost of this Exclusive product is 25000 Indian Rupees in silver. For inquiry mail at manavsinghi@gmail.com

Thursday, 5 January 2017

Street Photography - Jaleb chowk, Jaipur

Street Photography - Jaleb chowk, Jaipur
Ok so now new year celebrations are over and time to get back to work. This is my first street shot of 2017 which I took today at Jaleb chowk, Jaipur.